Sunday, 1 July 2018

नमस्कार दोस्तों|

आपका मेरे इस ब्लॉग में एक बार फिर से स्वागत है|

आज  हमारे चर्चा का विषय हिंदुस्तान के उस महान राजा के बारे में है जिसे भारत  का नेपोलियन भी कहा जाता है| भारत का नेपोलियन पढ़कर आप ये तो समझ ही गए होंगे कि मै गुप्त साम्राज्य के चौथे राजा भारत के नेपोलियन महाराजाधिराज चक्रवर्ती महाराज समुद्रगुप्त के बारे में बोल रहा हूँ | आइए हम समझें की समुद्रगुप्त को भारत का नेपोलियन क्यों कहा जाता है और इनकी प्रारंभिक जीवन और इनके राजा बनने तक का सफर कैसा रहा तो आइए शुरू करते हैं|

महाराज समुद्रगुप्त के जन्म के बारे में ज्यादा जानकारी उपलब्ध नहीं है| इनका शासनकाल 330 ईसवी से 380 ईसवी तक था|  इनके पिता का नाम चंद्रगुप्त था| दोस्तों यह मौर्य साम्राज्य वाले चंद्रगुप्त नहीं हैं| यह गुप्त साम्राज्य के चंद्रगुप्त है| कई बार समुद्रगुप्त का नाम महान अशोक मौर्य के साथ भी लिया जाता है पर दोनों में बहुत अंतर था| एक में अपने आप को भारत विजेता बनाने का जुनून था तो दूसरे में भारत को दुनिया के सबसे ऊँची ऊँचाई में पहुचने का जुनून था| कई किताबों में लिखा हुआ मिलता है कि समुद्रगुप्त अपने समय के बहुत निपुण सेनानायक थे| इनके एक अग्रज  भाई भी थे जिनका नाम था कशा, चंद्रगुप्त को इसके अलावा भी कई पुत्र थे जिसमें कशा सबसे बड़ा था और समुद्रगुप्त उससे छोटे थे पर कशा को शराब और अफीम की बहुत बुरी लत थी जिसके चलते चंद्रगुप्त ने अपने दूसरे बड़े पुत्र यानी समुद्रगुप्त को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया उन्होंने समुद्रगुप्त को अपने जीवन काल में ही कीराजा घोषित कर दिया था और उन्होंने राजपाट से सन्यास ले लिया था| उनके सन्यास लेने के कुछ वर्ष पश्चात उनकी आपातकालीन मृत्यु हो गयी थी यह खबर जैसे ही उनके बड़े पुत्र कशा को पता चला उसने अपने भाई समुद्रगुप्त के खिलाफ विद्रोह कर दिया और मगध को अपने अधीन करने के लिए समुद्रगुप्त पर आक्रमण कर दिया| यहीं से समुद्रगुप्त की विजय यात्रा शुरू हुई समुद्रगुप्त ने बड़े ही कुशलता पूर्ण नेतृत्व और साहस के बल पर अपने बड़े भाई कशा को युद्ध में पराजित किया इस पराजय की हार की वजह से कशा की मृत्यु हो गई | इसके बाद उन्होंने देखा कि उनके पिता चंद्रगुप्त की मृत्यु के बाद जितने राज्य मगध  के अधिन  थे वह धीरे-धीरे अपने आप को स्वतंत्र करते जा रहे थे और भारत  बहुत से छोटे छोटे राज्यों में बंट चुका था| उनको अब एक ही बात का डर था कि अगर यह बात दूसरे देशों में पता चली तो वह भारत पर आक्रमण कर सकते हैं और भारत के यह छोटे-छोटे राज्य इतनी विशाल सेना को रोकने में असमर्थ रहेंगे उन्होंने फिर अपनी विजय यात्रा शुरू की| उन्होंने अपनी विजय यात्रा अपने पड़ोसी राज्यों को जीत कर शुरू की| उन्होंने सबसे पहले अपने पड़ोसी राज्य अहिच्छत्र के शासक को हराया और फिर अपने दक्षिण के पड़ोसी राज्य के राजा नाथसिंह को हराया इसके बाद समुद्रगुप्त ने दक्षिण के राजाओं के खिलाफ विजय अभियान शुरू किया उन्होंने यह विजय अभियान बंगाल की खाड़ी से चालू किया था| उन्होंने बंगाल की खाड़ी में बंगाल के  राजा को पराजित किया  इसके बाद उन्होंने उड़ीसा के ऊपर आक्रमण करके वहां के राजा गंजम सेन को पराजित किया | इसके बाद वह दक्षिण में थोड़ा और अंदर गए उस समय दक्षिण की नदियों पर बहुत सारे छोटे छोटे राज्य बसे हुए थे इसमें 2 नदियां प्रमुख थी गोदावरी और कृष्णा| नदी जीतने के बाद उन्होंने विशाखापट्टनम को भी अपने नियंत्रण में ले लिया  इसके बाद उन्होंने कांचीपुरम को विवश कर दिया उन्हें हर साल 50000 स्वर्ण मुद्राओं देने को| जब समुद्रगुप्त दक्षिण में विजय अभियान चला रहे थे तब प्रयाग( वर्तमान इलाहाबाद) के राजा ने मगध के खिलाफ विद्रोह शुरू कर दिया था और उसकीसाथ दक्षिण के नौ राजा और उत्तर के 12 राजाओं ने दिया | समुद्रगुप्त को यह बात जब पता चली उन्होंने उन सारे 21 राजाओं को अपनी सेना के साथ बड़ी बहादुरी और युद्धनीति से पराजित कर दिया | इन्होंने यह प्रतिज्ञा भीली  कि जब तक वो उन  21 राजाओं को हरा नहीं देते तब तक वो  मगध और पाटलिपुत्र की सीमा में प्रवेश नहीं करेंगे|उन्होंने इन सारे राजाओं को हरा दिया इसके बाद ही उन्होंने मगध में प्रवेश किया| कहा जाता है कि महाराज समुद्रगुप्त का राज्य हिमालय के कृत्रिपुर नगर से लेकर दक्षिण के कांचीपुरम तथा और पश्चिम में ईरान से लेकर आसाम तक फैला हुआ था|

यह सारी बातें प्रयाग पद्धति में लिखी हुई है| प्रयाग पद्धति में लिखा हुआ है कि समुद्रगुप्त न केवल महान राजा थे बल्कि वह संगीत प्रेमी और दूसरी कलाओं के भी शौकीन थे| समुद्रगुप्त ने अपने समय में कई महान संगीतकारों को अपने दरबार में जगह दी थी और कहा जाता है कि उनके कुछ सिक्कों पर संगीत के वस्तुओं के निशान भी मिलते हैं| समुद्रगुप्त के समय को भारत का स्वर्ण युग भी कहा जाता है| अब मैं आपको बताऊंगा कि समुद्रगुप्त के समय को भारत कास्वर्ण युग क्यों कहा जाता है|

कई लोग जो नहीं जानते कि समुद्रगुप्त के समय को भारत का स्वर्ण युग क्यों कहा जाता है वह लोग यह मानते हैं कि इस समुद्रगुप्त के समय में सोने के सिक्के और सोने के आभूषण बहुत चलते थे और इन्होंने ही भारत को सोने की चिड़िया बनाया इसलिए इनके समय को भारत का स्वर्ण युग कहते हैं| पर दोस्तों ऐसा नहीं था, भारत को सोने की चिड़िया इनके भी पहले से कहा जाता रहा है  पर समुद्रगुप्त के समय को भारत का स्वर्ण युग कहा जाता है क्योंकि इनके समय में कई कलाओं को भारत में पनपने की शक्ति मिली और इन्होंने एक ऐसी प्रथा को खत्म करवा दिया जिसकी वजह से जो बच्चे बहुत होशियार और बुद्धिमान थे उन्हें उसमें मदद मिली| प्रथा यह थी कि जिस बच्चे का पिता जो काम करता है उस बच्चे को भी बड़े होकर उसी काम को करना होगा| जिसकी वजह से जो बच्चे दूसरे कामों में जैसे युद्ध नीति शास्त्र नीति और इत्यादि में निपुण थे उनको भी वही काम करना पड़ता था जो उनके पिता करते थे| समुद्रगुप्त ने यह बात अपने बचपन में ही जान ली थी तो उन्होंने यह बात यह समस्या सबसे पहले खत्म करवा दी थी| दोस्तों एक और कारण है कि क्यों समुद्रगुप्त के समय को स्वर्ण युग बोलते हैं और वो यह की समुद्र गुप्त के समय में विज्ञान,व्याकरण,गणित,भूगोल कलाओं इत्यादि में नई खोजें हुई थी, इसलिए भी इस समय को भारत का स्वर्ण युग कहते हैं|

अब दोस्तों आप यह पढ़ कर सोच रहे होंगे इतना सब तो ठीक है पर समुद्रगुप्त को ही भारत का नेपोलियन क्यों कहा जाता है जबकि आपने पढ़ा होगा कि सम्राट अशोक भी काफी बड़े राजा थे| इनके अलावा आपने मैंने अपने पहले ब्लॉग में राणा सांगा के बारे में जिक्र किया है जो कि पूरे भारत के राजा थे| इन सब महान राजाओं के होते हुए भी अब मैं आपको यह बताऊंगा कि समुद्रगुप्त को भारत का नेपोलियन क्यों कहा जाता है|

समुद्रगुप्त को भारत का नेपोलियन इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह पहले ऐसे हिंदू राजा थे जिन्होंने दूसरे देश पर आक्रमण ना करते हुए भी उस देश को भारत में सम्मिलित कर लिया| यह देश था ईरान| हुआ कुछ यूं था कि ईरान के राजा इस समय बहुत कमजोर हो गाए थे और उन्हें यह डर सता रहा था कि कहीं समुद्रगुप्त की नजर इरान पर पड़ गई तो वह समुद्रगुप्त का सामना नहीं कर पाएंगे और उनको हार का सामना करना पड़ेगा| उस समय क्योंकि इरान में बहुत ज्यादा मात्रा में सोना और चांदी हीरा मोती उपलब्ध थे तो उनको यह सब की लूट का डर था तो उस समय ईरान के राजा ने स्वयं अपने एक सैनिक द्वारा समुद्रगुप्त को पत्र भेजा और समुद्रगुप्त की अधीनता स्वीकार कर ली| और समुद्रगुप्त को खुश रखने के लिए वह हर महीने एक हीरा समुद्रगुप्त को भेजते थे इसी कारण से वि.एन. स्मिथ  एक बहुत बड़े इतिहासकार हैं उन्होंने भी अपनी किताब में समुद्रगुप्त को भारत का नेपोलियन घोषित किया है| इतना ही नहीं स्वयं नेपोलियन को जब टीपू सुल्तान ने समुद्रगुप्त की दास्तां सुनाई तो उन्होंने  समुद्रगुप्त को भारत का  नेपोलियन कहा था| मैं आपको एक बार फिर से इनके राज्यों के बारे में बता देता हूँ| इनके अधिकार में जो राज्य थे उनके नाम हैं-गंधार, नेपाल , असम ,बिहार, तक्षिला, ईरान, मरवार, हिमालय, प्रयाग,आर्यवत, अछितोर, बंगाल, ओडिशा, विशाखापट्नम, कंचिपुरम और पूरा दक्षिण भारत| मैं आप लोगों को एक बात और बताना चाहता हूँ और वो यह की अगर आप कई किताबों में पढेंगे तो उसमे समुद्रगुप्त के बेटे यानि चन्द्रगुप्त 2 (विक्रमादित्य) के समय को भी भारत का स्वर्ण युग कहा जाता है| पर एसा नहीं है| समुद्रगुप्त अपने समय में कुछ और खोज और अविष्कार करना चाहते थे पर उनकी मृत्यु हो गयी और वो कार्य उनके पुत्र ने किये इसलिए कई किताबों में विक्रमादित्य के समय को भारत का स्वर्ण युग कहा जाता है जो की वास्तव में गलत है| असली स्वर्ण युग की शुरुआत समुद्रगुप्त ने की थी विक्रमादित्य ने नहीं| और हाँ दोस्तों यह वो ही विक्रम बेताल वाले विक्रमादित्य हैं| अगर आप को इस ब्लॉग के बारे में कुछ प्रश्न पूछना है तो नीचे कमेंट कर के पूछें|

एक विशेष बात - मैं राजपूतों को बहुत पसंद करता हूँ इस के चलते मेरे को एक व्यक्ति ने ताना मारते हुए कहा राजपूतों का राज तो केवल भारत और उत्तर में ही था, पर मौर्यों और गुप्त राजाओं का राज्य तो भारत से बाहर भी था| अगर वह व्यक्ति यह ब्लॉग पढ़ रहें हैं तो मै उन्हें बताना चाहूँगा कि मौर्य और गुप्त दोनों ही राजपुतों के ही वर्ग हैं क्योंकि सन 1100 के पहले तक राजा वर्ण के अनुसार बनते थे जो केवल क्षत्रिय वर्ण के ही हो सकते थे और राजपूत क्षत्रिय होते थे|

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 धन्यवाद
 01\07\2018  

                                     परम कुमार
                                       कक्षा-9
                              कृष्णा पब्लिक स्कूल
                                       रायपुर  
ऊपर दी गयी फोटो इस लिंक से ली गयी है -https://roar.media/hindi/main/viral/indias-great-hindu-kings/

4 comments:

  1. Very good, keep it up,
    👏👏👏👏👏👏💯💯💯💯💯

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  2. समुद्रगुप्त जी के बारे में लोगों को जानकारी अपेक्षकृत कम है। कई राजाओं ने भारत मे राज्य किया, किन्तु स्वर्णायुग केवल समुद्रगुप्त के काल को ही क्यों कहा जाता है,इसकी बहुत अच्छी विवेचना परम् ने की है। उनका साम्राज्य ईरान तक था। उनका योगदान नेपोलियन से अधिक था, क्योंकि उन्होंने कला,संगीत को भी बढ़ावा दिया,कुप्रथा को समाप्त किया।

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  3. A lot to know in this post, well done.

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